Bootstrap Image Preview
shayaridunia.com

Momin Khan Monin - Ai Aarzu-e-Qatl Zara DIl Ko Thamna

ऐ आरज़ू-ए-क़त्ल ज़रा दिल को थामना 

मुश्किल पड़ा मिरा मिरे क़ातिल को थामना 

-----------*----------

तासीर-ए-बे-क़रारी-ए-नाकाम आफ़रीं 

है काम उन से शोख़-ए-शमाइल को थामना 

-----------*----------

देखे है चाँदनी वो ज़मीं पर न गिर पड़े 

ऐ चर्ख़ अपने तू मह-ए-कामिल को थामना 

-----------*----------

मुज़्तर हूँ किस का तर्ज़-ए-सुख़न से समझ गया 

अब ज़िक्र क्या है सामा-ए-आक़िल को थामना 

-----------*----------

हो सरसर-ए-फ़ुग़ाँ से न क्यूँकर वो मुज़्तरिब 

मुश्किल हुआ है पर्दा-ए-महमिल को थामना 

-----------*----------

सीखे हैं मुझ से नाला-ए-नय आसमाँ-शिकन 

सय्याद अब क़फ़स में अनादिल को थामना 

-----------*----------

ये ज़ुल्फ़ ख़म-ब-ख़म न हो क्या ताब-ए-ग़ैर है 

तेरे जुनूँ-ज़दे की सलासिल को थामना 

-----------*----------

ऐ हमदम आह तल्ख़ी-ए-हिज्राँ से दम नहीं 

गिरता है देख जाम-ए-हलाहिल को थामना 

-----------*----------

सीमाब-वार मर गए ज़ब्त-ए-क़लक़ से हम 

क्या क़हर है तबीअत-ए-माइल को थामना 

-----------*----------

आग़ोश-ए-गोर हो गई आख़िर लहूलुहान 

आसाँ नहीं है आप के बिस्मिल को थामना 

-----------*----------

सीने पे हाथ धरते ही कुछ दम पे बन गई 

लो जान का अज़ाब हुआ दिल को थामना 

-----------*----------

बाक़ी है शौक़-ए-चाक-ए-गरेबाँ अभी मुझे 

बस ऐ रफ़ूगर अपनी अनामिल को थामना 

-----------*----------

मत माँगियो अमान बुतों से कि है हराम 

'मोमिन' ज़बान-ए-बेहूदा साइल को थामना 

-----------*----------

  • 17-Jul-2017
  • |
  • 329 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Momin Khan Momin - Asar usko zara nahi hota

असर उस को ज़रा नहीं होता 

रंज राहत-फ़ज़ा नहीं होता 

-----------*----------

बेवफ़ा कहने की शिकायत है 

तो भी वादा-वफ़ा नहीं होता 

-----------*----------

ज़िक्र-ए-अग़्यार से हुआ मालूम 

हर्फ़-ए-नासेह बुरा नहीं होता 

-----------*----------

किस को है ज़ौक़-ए-तल्ख़-कामी लेक 

जंग बिन कुछ मज़ा नहीं होता 

-----------*----------

तुम हमारे किसी तरह न हुए 

वर्ना दुनिया में क्या नहीं होता 

-----------*----------

उस ने क्या जाने क्या किया ले कर 

दिल किसी काम का नहीं होता 

-----------*----------

इम्तिहाँ कीजिए मिरा जब तक 

शौक़ ज़ोर-आज़मा नहीं होता 

-----------*----------

एक दुश्मन कि चर्ख़ है न रहे 

तुझ से ये ऐ दुआ नहीं होता 

-----------*----------

आह तूल-ए-अमल है रोज़-फ़ुज़ूँ 

गरचे इक मुद्दआ नहीं होता 

-----------*----------

तुम मिरे पास होते हो गोया 

जब कोई दूसरा नहीं होता 

-----------*----------

हाल-ए-दिल यार को लिखूँ क्यूँकर 

हाथ दिल से जुदा नहीं होता 

-----------*----------

रहम बर-ख़स्म-ए-जान-ए-ग़ैर न हो 

सब का दिल एक सा नहीं होता 

-----------*----------

दामन उस का जो है दराज़ तो हो 

दस्त-ए-आशिक़ रसा नहीं होता 

-----------*----------

चारा-ए-दिल सिवाए सब्र नहीं 

सो तुम्हारे सिवा नहीं होता 

-----------*----------

क्यूँ सुने अर्ज़-ए-मुज़्तर ऐ 'मोमिन' 

सनम आख़िर ख़ुदा नहीं होता 

-----------*----------

  • 17-Jul-2017
  • |
  • 447 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Waseem Barelvi - Mai.n ye nahi kehta ki mera sir na milega

मैं ये नहीं कहता कि मिरा सर न मिलेगा 

लेकिन मिरी आँखों में तुझे डर न मिलेगा 

---------------*--------------

सर पर तो बिठाने को है तय्यार ज़माना 

लेकिन तिरे रहने को यहाँ घर न मिलेगा 

---------------*--------------

जाती है चली जाए ये मय-ख़ाने की रौनक़ 

कम-ज़र्फ़ों के हाथों में तो साग़र न मिलेगा 

---------------*--------------

दुनिया की तलब है तो क़नाअत ही न करना 

क़तरे ही से ख़ुश हो तो समुंदर न मिलेगा

---------------*--------------

  • 17-Jul-2017
  • |
  • 424 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Waseem Barelvi - Mai.n is ummeed pe dooba ki tu bacha lega

मैं इस उमीद पे डूबा कि तू बचा लेगा 

अब इस के ब'अद मिरा इम्तिहान क्या लेगा 

---------------*--------------

ये एक मेला है व'अदा किसी से क्या लेगा 

ढलेगा दिन तो हर इक अपना रास्ता लेगा 

---------------*--------------

मैं बुझ गया तो हमेशा को बुझ ही जाऊँगा 

कोई चराग़ नहीं हूँ कि फिर जला लेगा 

---------------*--------------

कलेजा चाहिए दुश्मन से दुश्मनी के लिए 

जो बे-अमल है वो बदला किसी से क्या लेगा 

---------------*--------------

मैं उस का हो नहीं सकता बता न देना उसे 

लकीरें हाथ की अपनी वो सब जला लेगा 

---------------*--------------

हज़ार तोड़ के आ जाऊँ उस से रिश्ता 'वसीम' 

मैं जानता हूँ वो जब चाहेगा बुला लेगा 

---------------*--------------

  • 17-Jul-2017
  • |
  • 293 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Waseem Barelvi - Mai.n Apne khwab se bichda nazar nahi aata

मैं अपने ख़्वाब से बिछड़ा नज़र नहीं आता 

तो इस सदी में अकेला नज़र नहीं आता 

---------------*--------------

अजब दबाओ है उन बाहरी हवाओं का 

घरों का बोझ भी उठता नज़र नहीं आता 

---------------*--------------

मैं तेरी राह से हटने को हट गया लेकिन 

मुझे तो कोई भी रस्ता नज़र नहीं आता 

---------------*--------------

मैं इक सदा पे हमेशा को घर तो छोड़ आया 

मगर पुकारने वाला नज़र नहीं आता 

---------------*--------------

धुआँ भरा है यहाँ तो सभी की आँखों में 

किसी को घर मिरा जलता नज़र नहीं आता 

---------------*--------------

ग़ज़ल-सराई का दावा तो सब करे हैं 'वसीम' 

मगर वो 'मीर' सा लहजा नज़र नहीं आता 

---------------*--------------

  • 17-Jul-2017
  • |
  • 301 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Waseem Barelvi - Mai.n Aasma.n pe bahot der reh nahi sakta

मैं आसमाँ पे बहुत देर रह नहीं सकता 

मगर ये बात ज़मीं से तो कह नहीं सकता 

---------------*--------------

किसी के चेहरे को कब तक निगाह में रक्खूँ 

सफ़र में एक ही मंज़र तो रह नहीं सकता 

---------------*--------------

ये आज़माने की फ़ुर्सत तुझे कभी मिल जाए 

मैं आँखों आँखों में क्या बात कह नहीं सकता 

---------------*--------------

सहारा लेना ही पड़ता है मुझ को दरिया का 

मैं एक क़तरा हूँ तन्हा तो बह नहीं सकता 

---------------*--------------

लगा के देख ले जो भी हिसाब आता हो 

मुझे घटा के वो गिनती में रह नहीं सकता 

---------------*--------------

ये चंद लम्हों की बे-इख़्तियारियाँ हैं 'वसीम' 

गुनह से रिश्ता बहुत देर रह नहीं सकता 

---------------*--------------

  • 17-Jul-2017
  • |
  • 347 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Waseem Barelvi - Lahoo na ho to qalam tarjuma nahi hota

लहू न हो तो क़लम तर्जुमाँ नहीं होता 

हमारे दौर में आँसू ज़बाँ नहीं होता 

---------------*--------------

जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा 

किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता 

---------------*--------------

ये किस मक़ाम पे लाई है मेरी तन्हाई 

कि मुझ से आज कोई बद-गुमाँ नहीं होता 

---------------*--------------

बस इक निगाह मिरी राह देखती होती 

ये सारा शहर मिरा मेज़बाँ नहीं होता 

---------------*--------------

तिरा ख़याल न होता तो कौन समझाता 

ज़मीं न हो तो कोई आसमाँ नहीं होता 

---------------*--------------

मैं उस को भूल गया हूँ ये कौन मानेगा 

किसी चराग़ के बस में धुआँ नहीं होता 

---------------*--------------

'वसीम' सदियों की आँखों से देखिए मुझ को 

वो लफ़्ज़ हूँ जो कभी दास्ताँ नहीं होता 

---------------*--------------

  • 17-Jul-2017
  • |
  • 311 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Parveen Shakir - Bichda Hai Jo Ik Baar To Milte Nahi Dekha

बिछड़ा है जो इक बार तो मिलते नहीं देखा 

इस ज़ख़्म को हम ने कभी सिलते नहीं देखा 

-----------------*------------------

इक बार जिसे चाट गई धूप की ख़्वाहिश 

फिर शाख़ पे उस फूल को खिलते नहीं देखा 

-----------------*------------------

यक-लख़्त गिरा है तो जड़ें तक निकल आईं 

जिस पेड़ को आँधी में भी हिलते नहीं देखा 

-----------------*------------------

काँटों में घिरे फूल को चूम आएगी लेकिन 

तितली के परों को कभी छिलते नहीं देखा 

-----------------*------------------

किस तरह मिरी रूह हरी कर गया आख़िर 

वो ज़हर जिसे जिस्म में खिलते नहीं देखा 

-----------------*------------------

  • 16-Jul-2017
  • |
  • 458 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Parveen Shakir - Agarche Tujh se Bahot Ikhtelaaf Bhi Na Hua

अगरचे तुझ से बहुत इख़्तिलाफ़ भी न हुआ 

मगर ये दिल तिरी जानिब से साफ़ भी न हुआ 

-----------------*------------------

तअ'ल्लुक़ात के बर्ज़ख़ में ही रखा मुझ को 

वो मेरे हक़ में न था और ख़िलाफ़ भी न हुआ 

-----------------*------------------

अजब था जुर्म-ए-मोहब्बत कि जिस पे दिल ने मिरे 

सज़ा भी पाई नहीं और मुआ'फ़ भी न हुआ 

-----------------*------------------

मलामतों में कहाँ साँस ले सकेंगे वो लोग 

कि जिन से कू-ए-जफ़ा का तवाफ़ भी न हुआ 

-----------------*------------------

अजब नहीं है कि दिल पर जमी मिली काई 

बहुत दिनों से तो ये हौज़ साफ़ भी न हुआ 

-----------------*------------------

हवा-ए-दहर हमें किस लिए बुझाती है 

हमें तो तुझ से कभी इख़्तिलाफ़ भी न हुआ 

-----------------*------------------

  • 16-Jul-2017
  • |
  • 354 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Parveen Shakir - Ab Bhala Chod Ke Ghar Kya Karte

अब भला छोड़ के घर क्या करते 

शाम के वक़्त सफ़र क्या करते 

-----------------*------------------

तेरी मसरूफ़ियतें जानते हैं 

अपने आने की ख़बर क्या करते 

-----------------*------------------

जब सितारे ही नहीं मिल पाए 

ले के हम शम्स-ओ-क़मर क्या करते 

-----------------*------------------

वो मुसाफ़िर ही खुली धूप का था 

साए फैला के शजर क्या करते 

-----------------*------------------

ख़ाक ही अव्वल ओ आख़िर ठहरी 

कर के ज़र्रे को गुहर क्या करते 

-----------------*------------------

राय पहले से बना ली तू ने 

दिल में अब हम तिरे घर क्या करते 

-----------------*------------------

इश्क़ ने सारे सलीक़े बख़्शे 

हुस्न से कस्ब-ए-हुनर क्या करते 

-----------------*------------------

  • 16-Jul-2017
  • |
  • 374 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com | Latest Shayari, Best Romantic Shayari, 2 Line Shayari, New Love Shayari, Top Dard Shayari, Ghazal, SMS, Whatsapp Status and Festival Wishes in English Font, Latest Zindagi Shayari, Deep-Best Life Quotes, Whatsapp Life Status Shayari On Life, Sad Zindagi Shayari, hindi sad shayari on life, Best Life Shayari, ज़िन्दगी शायरी Hindi collection, Top Heart Touching Zindagi Shayari, Sad Life Sms, Hindi Quotes On Life In Hindi Fonts, my life my shayari, Lonely Life Shayari, True Lines About Life, Good Shayari on Jindagi, Sad Shayari on Zindagi, Positive Life Quotes on Smile in Hindi, Best Inspirational Hindi Poems on Life, Short Reality of Life Quotes, Sad True Life Shayari on Dil, Ultimate Shayari of Life, Sad Zindagi Message on Life For Friends, Zindagi Shayari is depend on real life and related with life thoughts,Dard Shayari, दर्द शायरी, Dard Bhari Shayari, Dard Ki Shayari, Painful Shayari, Hindi Dard Shayari,Aankhein Shayari, Alone Shayari, Ashq Shayari, Attitude Shayari, Bewafa Shayari, Birthday Shayari, Bollywood Shayari, Broken Heart Shayari, Dard Bhari Shayari, Desh Bhakti Shayari, Dil Shayari, Dooriyan Shayari, Dua Shayari, Friendship Shayari, Funny Shayari, Gam Bhari Shayari, Good Morning Shayari, Heart Touching Lines, Hindi Shayari, Inspirational Shayari, Insult Shayari, Intezaar Shayari, Judai Shayari, Love Shayari, Maa Shayari, Maut Shayari, Nafrat Shayari, Punjabi Shayari, Romantic Shayari, Sad Shayari, Sharab Shayari, Shayari On Beauty, Shayari On Life, Sorry Shayari, Two Line Shayari, Yaad Shayari