Bootstrap Image Preview
shayaridunia.com

Josh Malihabadi - Udhar Mazhab Idhar Insa.n Ki fitrat Ka Taqaza Hai

उधर मज़हब इधर इंसाँ की फ़ितरत का तक़ाज़ा है 

वो दामान-ए-मह-ए-कनआँ है ये दस्त-ए-ज़ुलेख़ा है 

-----------------*------------------

इधर तेरी मशिय्यत है उधर हिकमत रसूलों की 

इलाही आदमी के बाब में क्या हुक्म होता है 

-----------------*------------------

ये माना दोनों ही धोके हैं रिंदी हो कि दरवेशी 

मगर ये देखना है कौन सा रंगीन धोका है 

-----------------*------------------

खिलौना तो निहायत शोख़ ओ रंगीं है तमद्दुन का 

मुआर्रिफ़ मैं भी हूँ लेकिन खिलौना फिर खिलौना है 

-----------------*------------------

मिरे आगे तो अब कुछ दिन से हर आँसू मोहब्बत का 

कनार-ए-आब-ए-रुक्नाबाद ओ गुलगश्त-ए-मुसल्ला है 

-----------------*------------------

मुझे मालूम है जो कुछ तमन्ना है रसूलों की 

मगर क्या दर-हक़ीक़त वो ख़ुदा की भी तमन्ना है 

-----------------*------------------

मशिय्यत खेलना ज़ेबा नहीं मेरी बसीरत से 

उठा ले इन खिलौनों को ये दुनिया है वो उक़्बा है 

-----------------*------------------

  • 16-Jul-2017
  • |
  • 267 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Josh Malihabadi - Behoshiyo.n ne aor khabardar kar dia

बेहोशियों ने और ख़बरदार कर दिया 

सोई जो अक़्ल रूह ने बेदार कर दिया 

-----------------*------------------

अल्लाह रे हुस्न-ए-दोस्त की आईना-दारियाँ 

अहल-ए-नज़र को नक़्श-ब-दीवार कर दिया 

-----------------*------------------

या रब ये भेद क्या है कि राहत की फ़िक्र ने 

इंसाँ को और ग़म में गिरफ़्तार कर दिया 

-----------------*------------------

दिल कुछ पनप चला था तग़ाफ़ुल की रस्म से 

फिर तेरे इल्तिफ़ात ने बीमार कर दिया 

-----------------*------------------

कल उन के आगे शरह-ए-तमन्ना की आरज़ू 

इतनी बढ़ी कि नुत्क़ को बेकार कर दिया 

-----------------*------------------

मुझ को वो बख़्शते थे दो आलम की नेमतें 

मेरे ग़ुरूर-ए-इश्क़ ने इंकार कर दिया 

-----------------*------------------

ये देख कर कि उन को है रंगीनियों का शौक़ 

आँखों को हम ने दीदा-ए-ख़ूँ-बार कर दिया 

-----------------*------------------

  • 16-Jul-2017
  • |
  • 398 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Josh Malihabadi - Ai malihabad ke rangi.n gulista.n alwida

ऐ मलिहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा

अलविदा ऐ सरज़मीन-ए-सुबह-ए-खन्दां अलविदा

अलविदा ऐ किशवर-ए-शेर-ओ-शबिस्तां अलविदा

अलविदा ऐ जलवागाहे हुस्न-ए-जानां अलविदा

तेरे घर से एक ज़िन्दा लाश उठ जाने को है

आ गले मिल लें कि आवाज़-ए-जरस आने को है

ऐ मलिहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा

----------*----------

हाय क्या-क्या नेमतें मिली थीं मुझ को बेबहा

यह खामोशी यह खुले मैदान यह ठन्डी हवा

वाए, यह जां बख्श गुस्ताहाए रंगीं फ़िज़ां

मर के भी इनको न भूलेगा दिल-ए-दर्द आशना

मस्त कोयल जब दकन की वादियों में गायेगी

यह सुबह की छांव बगुलों की बहुत याद आएगी

ऐ मलिहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा

----------*----------

कल से कौन इस बाग़ को रंगीं बनाने आएगा

कौन फूलों की हंसी पर मुस्कुराने आएगा

कौन इस सब्ज़े को सोते से जगाने आएगा

कौन जागेगा क़मर के नाज़ उठाने के लिये

चांदनी रात को ज़ानू पर सुलाने के लिये

ऐ मलिहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा

----------*----------

आम के बाग़ों में जब बरसात होगी पुरखरोश

मेरी फ़ुरक़त में लहू रोएगी चश्मे मय फ़रामोश

रस की बूंदें जब उड़ा देंगी गुलिस्तानों के होश

कुंज-ए-रंगीं में पुकारेंगी हवाएँ 'जोश जोश'

सुन के मेरा नाम मौसम ग़मज़दा हो जाएगा

एक महशर सा गुलिस्तां में बपा हो जाएगा

ऐ मलिहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा

----------*----------

आ गले मिल लें खुदा हाफ़िज़ गुलिस्तान-ए-वतन

ऐ अमानीगंज के मैदान ऐ जान-ए-वतन

अलविदा ऐ लालाज़ार-ओ-सुम्बुलिस्तान-ए-वतन

अस्सलाम ऐ सोह्बत-ए-रंगीं-ए-यारान-ए-वतन

हश्र तक रहने न देना तुम दकन की खाक में

दफ़न करना अपने शाएर को वतन की खाक में

ऐ मलिहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा

----------*----------

  • 15-Jul-2017
  • |
  • 285 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Josh Malihabadi- Ibadat karte hai jo log jannat ki tamanna me

इबादत करते हैं जो लोग जन्नत की तमन्ना में

इबादत तो नहीं है इक तरह की वो तिजारत है

---------------------*--------------------

जो डर के नार-ए-दोज़ख़ से ख़ुदा का नाम लेते हैं

इबादत क्या वो ख़ाली बुज़दिलाना एक ख़िदमत है

---------------------*--------------------

मगर जब शुक्र-ए-ने'मत में जबीं झुकती है बन्दे की

वो सच्ची बन्दगी है इक शरीफ़ाना इत'अत है

---------------------*--------------------

कुचल दे हसरतों को बेनियाज़-ए-मुद्दा हो जा

ख़ुदी को झाड़ दे दामन से मर्द-ए-बाख़ुदा हो जा

---------------------*--------------------

उठा लेती हैं लहरें तहनशीं होता है जब कोई

उभरना है तो ग़र्क़-ए-बह्र-ए-फ़ना हो जा

---------------------*--------------------

  • 15-Jul-2017
  • |
  • 492 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Josh Malihabadi - Fir sir kisi ke dar pe jhukae hue hai hum

फिर सर किसी के दर पे झुकाए हुए हैं हम

पर्दे फिर आसमाँ के उठाए हुए हैं हम

---------------------*---------------------

छाई हुई है इश्क़ की फिर दिल पे बे-ख़ुदी

फिर ज़िंदगी को होश में लाए हुए हैं हम

---------------------*---------------------

जिस का हर एक जुज़्व है इक्सीर-ए-ज़िंदगी

फिर ख़ाक में वो जिंस मिलाए हुए हैं हम

---------------------*---------------------

हाँ कौन पूछता है ख़ुशी का नहुफ़्ता राज़

फिर ग़म का बार दिल पे उठाए हुए हैं हम

---------------------*---------------------

हाँ कौन दर्स-ए-इश्क़-ए-जुनूँ का है ख़्वास्त-गार

आए कि हर सबक़ को भुलाए हुए हैं हम

---------------------*---------------------

आए जिसे हो जादा-ए-रिफ़अत की आरज़ू

फिर सर किसी के दर पे झुकाए हुए हैं हम

---------------------*---------------------

बैअत को आए जिस को हो तहक़ीक़ का ख़याल

कौन-ओ-मकाँ के राज़ को पाए हुए हैं हम

---------------------*---------------------

हस्ती के दाम-ए-सख़्त से उकता गया है कौन

कह दो कि फिर गिरफ़्त में आए हुए हैं हम

---------------------*---------------------

हाँ किस के पा-ए-दिल में है ज़ंजीर-ए-आब-ओ-गिल

कह दो कि दाम-ए-ज़ुल्फ़ में आए हुए हैं हम

---------------------*---------------------

हाँ किस को जुस्तुजू है नसीम-ए-फ़राग़ की

आसूदगी को आग लगाए हुए हैं हम

---------------------*---------------------

हाँ किस को सैर-ए-अर्ज़-ओ-समा का है इश्तियाक़

धूनी फिर उस गली में रमाए हुए हैं हम

---------------------*---------------------

जिस पर निसार कौन-ओ-मकाँ की हक़ीक़तें

फिर 'जोश' उस फ़रेब में आए हुए हैं हम

---------------------*---------------------

  • 15-Jul-2017
  • |
  • 257 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Rahat Indori - Uski Kaththai aa.nkho me hai jantar mantar sab

उसकी कत्थई आँखों में हैं जंतर मंतर सब

उसकी कत्थई आँखों में हैं जंतर मंतर सब
चाक़ू वाक़ू, छुरियां वुरियां, ख़ंजर वंजर सब

जिस दिन से तुम रूठीं,मुझ से, रूठे रूठे हैं
चादर वादर, तकिया वकिया, बिस्तर विस्तर सब

मुझसे बिछड़ कर, वह भी कहां अब पहले जैसी है
फीके पड़ गए कपड़े वपड़े, ज़ेवर वेवर सब

जाने मैं किस दिन डूबूँगा, फिक्रें करते हैं
दरिया वरीया,  कश्ती वस्ती, लंगर वंगर सब

इश्क़ विश्क़ के सारे नुस्खे, मुझसे सीखते हैं
सागर वागर, मंज़र वंजर, जोहर वोहर सब

तुलसी ने जो लिखा अब कुछ बदला बदला हैं
रावण वावण, लंका वंका, बन्दर वंदर  सब

  • 14-Jul-2017
  • |
  • 663 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Mujhe Dubo ke bahut sharmsar rahti hai

mujhe Dubo ke bahut sharmsar rahti hai 

vo ek mauj jo dariya ke paar rahti hai 

---------------*---------------

hamare taaq bhi be-zar hai.n ujalo.n se 

diye ki lau bhi hava par savar rahti hai 

---------------*---------------

phir us ke ba.ad vahi baasi manzaro.n ke julus 

bahar chand hi lamhe bahar rahti hai 

---------------*---------------

isi se qarz chuka.e hai.n mai.n ne sadiyo.n ke 

ye zindagi jo hamesha udhar rahti hai 

---------------*---------------

hamari shahr ke danishvaro.n se yaari hai 

isi liye to qaba taar taar rahti hai 

---------------*---------------

mujhe ḳharidne vaalo qatar me.n aao 

vo chiiz huu.n jo pas-e-ishtihar rahti hai 

---------------*---------------

 

  • 14-Jul-2017
  • |
  • 357 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Mere karobar me.n sab ne badi imdad ki

mere karobar me.n sab ne baḌi imdad ki 

daad logo.n ki gala apna ġhazal ustad ki 

---------------*---------------

apni sa.nse.n bech kar mai.n ne jise abad ki 

vo gali jannat to ab bhi hai magar shaddad ki 

---------------*---------------

umr bhar chalte rahe a.nkho.n pe paTTi ba.ndh kar 

zindagi ko Dhu.nDne me.n zindagi barbad ki 

---------------*---------------

dastano.n ke sabhi kirdar kam hone lage 

aaj kaġhaz chunti phirti hai pari baġhdad ki 

---------------*---------------

ik sulagta chiḳhta mahaul hai aur kuchh nahi.n 

baat karte ho 'yagana' kis aminabad ki

---------------*---------------

  • 14-Jul-2017
  • |
  • 328 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Masjido.n ke sahn tak jaana bahut dushvar tha

masjido.n ke sahn tak jaana bahut dushvar tha 

dair se nikla to mere raste me.n daar tha 

---------------*---------------

dekhte hi dekhte shahro.n ki raunaq ban gaya 

kal yahi chehra hamare a.ino.n par baar tha 

---------------*---------------

apni qismat me.n likhi thi dhuup ki narazgi 

saya-e-divar tha lekin pas-e-divar tha 

---------------*---------------

sab ke dukh sukh us ke chehre par likhe paa.e ga.e 

aadmi kya tha hamare shahr ka aḳhbar tha 

---------------*---------------

ab mohalle bhar ke darvazo.n pe dastak hai nasib 

ik zamana tha ki jab mai.n bhi bahut ḳhuddar tha

---------------*---------------

 

  • 14-Jul-2017
  • |
  • 335 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Aa.nkh me.n paani rakho ho.nTo.n pe chi.ngari rakho

aa.nkh me.n paani rakho ho.nTo.n pe chi.ngari rakho 

zinda rahna hai to tarkibe.n bahut saari rakho 

------------------*-----------------

raah ke patthar se baḌh kar kuchh nahi.n hai.n manzile.n 

raste avaaz dete hai.n safar jaari rakho 

------------------*-----------------

ek hi naddi ke hai.n ye do kinare dosto 

dostana zindagi se maut se yaari rakho 

------------------*-----------------

aate jaate pal ye kahte hai.n hamare kaan me.n 

kuuch ka ailan hone ko hai tayyari rakho 

------------------*-----------------

ye zaruri hai ki a.nkho.n ka bharam qaa.em rahe 

niind rakho ya na rakho ḳhvab meyari rakho 

------------------*-----------------

ye hava.e.n uḌ na jaa.e.n le ke kaġhaz ka badan 

dosto mujh par koi patthar zara bhari rakho 

------------------*-----------------

le to aa.e sha.iri bazar me.n 'rahat' miya.n 

kya zaruri hai ki lahje ko bhi bazari rakho 

------------------*-----------------

  • 14-Jul-2017
  • |
  • 352 Views
  • |
  • |
shayaridunia.com | Latest Shayari, Best Romantic Shayari, 2 Line Shayari, New Love Shayari, Top Dard Shayari, Ghazal, SMS, Whatsapp Status and Festival Wishes in English Font, Latest Zindagi Shayari, Deep-Best Life Quotes, Whatsapp Life Status Shayari On Life, Sad Zindagi Shayari, hindi sad shayari on life, Best Life Shayari, ज़िन्दगी शायरी Hindi collection, Top Heart Touching Zindagi Shayari, Sad Life Sms, Hindi Quotes On Life In Hindi Fonts, my life my shayari, Lonely Life Shayari, True Lines About Life, Good Shayari on Jindagi, Sad Shayari on Zindagi, Positive Life Quotes on Smile in Hindi, Best Inspirational Hindi Poems on Life, Short Reality of Life Quotes, Sad True Life Shayari on Dil, Ultimate Shayari of Life, Sad Zindagi Message on Life For Friends, Zindagi Shayari is depend on real life and related with life thoughts,Dard Shayari, दर्द शायरी, Dard Bhari Shayari, Dard Ki Shayari, Painful Shayari, Hindi Dard Shayari,Aankhein Shayari, Alone Shayari, Ashq Shayari, Attitude Shayari, Bewafa Shayari, Birthday Shayari, Bollywood Shayari, Broken Heart Shayari, Dard Bhari Shayari, Desh Bhakti Shayari, Dil Shayari, Dooriyan Shayari, Dua Shayari, Friendship Shayari, Funny Shayari, Gam Bhari Shayari, Good Morning Shayari, Heart Touching Lines, Hindi Shayari, Inspirational Shayari, Insult Shayari, Intezaar Shayari, Judai Shayari, Love Shayari, Maa Shayari, Maut Shayari, Nafrat Shayari, Punjabi Shayari, Romantic Shayari, Sad Shayari, Sharab Shayari, Shayari On Beauty, Shayari On Life, Sorry Shayari, Two Line Shayari, Yaad Shayari