Bootstrap Image Preview

Ahmad Faraz - Ab ke rut badli ti khushbu ka safar dekhega kon

अब के रुत बदली तो ख़ुशबू का सफ़र देखेगा कौन 

ज़ख़्म फूलों की तरह महकेंगे पर देखेगा कौन 

-----------------*------------------

देखना सब रक़्स-ए-बिस्मल में मगन हो जाएँगे 

जिस तरफ़ से तीर आयेगा उधर देखेगा कौन 

-----------------*------------------

वो हवस हो या वफ़ा हो बात महरूमी की है 

लोग तो फल-फूल देखेंगे शजर देखेगा कौन 

-----------------*------------------

हम चिराग़-ए-शब ही जब ठहरे तो फिर क्या सोचना 

रात थी किस का मुक़द्दर और सहर देखेगा कौन 

-----------------*------------------

आ फ़सील-ए-शहर से देखें ग़नीम-ए-शहर को 

शहर जलता हो तो तुझ को बाम पर देखेगा कौन

-----------------*------------------

Ashq Shayari zindagi

Posted In : Ahmad Faraz

17-Jul-2017
304 views

0 Comments