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Allama Iqbal - Aflak se aata hai naalo.n ka jawab aakhir

अफ़्लाक से आता है नालों का जवाब आख़िर 

करते हैं ख़िताब आख़िर उठते हैं हिजाब आख़िर 

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अहवाल-ए-मोहब्बत में कुछ फ़र्क़ नहीं ऐसा 

सोज़ ओ तब-ओ-ताब अव्वल सोज़ ओ तब-ओ-ताब आख़िर 

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मैं तुझ को बताता हूँ तक़दीर-ए-उमम क्या है 

शमशीर-ओ-सिनाँ अव्वल ताऊस-ओ-रुबाब आख़िर 

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मय-ख़ाना-ए-यूरोप के दस्तूर निराले हैं 

लाते हैं सुरूर अव्वल देते हैं शराब आख़िर 

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क्या दबदबा-ए-नादिर क्या शौकत-ए-तैमूरी 

हो जाते हैं सब दफ़्तर ग़र्क़-ए-मय-ए-नाब आख़िर 

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ख़ल्वत की घड़ी गुज़री जल्वत की घड़ी आई 

छुटने को है बिजली से आग़ोश-ए-सहाब आख़िर 

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था ज़ब्त बहुत मुश्किल इस सैल-ए-मआ'नी का 

कह डाले क़लंदर ने असरार-ए-किताब आख़िर 

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zindagi Duniya Shayari

Posted In : Allama Iqbal

16-Jul-2017
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