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Allama Iqbal - Tujhe yaad kya nahi hai mere dil ka wo zamana

तुझे याद क्या नहीं है मिरे दिल का वो ज़माना 

वो अदब-गह-ए-मोहब्बत वो निगह का ताज़ियाना 

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ये बुतान-ए-अस्र-ए-हाज़िर कि बने हैं मदरसे में 

न अदा-ए-काफ़िराना न तराश-ए-आज़राना 

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नहीं इस खुली फ़ज़ा में कोई गोशा-ए-फ़राग़त 

ये जहाँ अजब जहाँ है न क़फ़स न आशियाना 

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रग-ए-ताक मुंतज़िर है तिरी बारिश-ए-करम की 

कि अजम के मय-कदों में न रही मय-ए-मुग़ाना 

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मिरे हम-सफ़ीर इसे भी असर-ए-बहार समझे 

उन्हें क्या ख़बर कि क्या है ये नवा-ए-आशिक़ाना 

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मिरे ख़ाक ओ ख़ूँ से तू ने ये जहाँ किया है पैदा 

सिला-ए-शहीद क्या है तब-ओ-ताब-ए-जावेदाना 

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तिरी बंदा-परवरी से मिरे दिन गुज़र रहे हैं 

न गिला है दोस्तों का न शिकायत-ए-ज़माना 

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Love Shayari Dil Shayari Yaad Shayari

Posted In : Allama Iqbal

16-Jul-2017
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