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Josh Malihabadi - Behoshiyo.n ne aor khabardar kar dia

बेहोशियों ने और ख़बरदार कर दिया 

सोई जो अक़्ल रूह ने बेदार कर दिया 

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अल्लाह रे हुस्न-ए-दोस्त की आईना-दारियाँ 

अहल-ए-नज़र को नक़्श-ब-दीवार कर दिया 

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या रब ये भेद क्या है कि राहत की फ़िक्र ने 

इंसाँ को और ग़म में गिरफ़्तार कर दिया 

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दिल कुछ पनप चला था तग़ाफ़ुल की रस्म से 

फिर तेरे इल्तिफ़ात ने बीमार कर दिया 

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कल उन के आगे शरह-ए-तमन्ना की आरज़ू 

इतनी बढ़ी कि नुत्क़ को बेकार कर दिया 

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मुझ को वो बख़्शते थे दो आलम की नेमतें 

मेरे ग़ुरूर-ए-इश्क़ ने इंकार कर दिया 

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ये देख कर कि उन को है रंगीनियों का शौक़ 

आँखों को हम ने दीदा-ए-ख़ूँ-बार कर दिया 

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Love Shayari Khuda Shayari Attitude Shayari Friendship

Posted In : Josh Malihabadi

16-Jul-2017
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