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Kaifi Azmi - Ai Saba Laot Ke Kis Sheher SeTu Aati Hai

ऐ सबा! लौट के किस शहर से तू आती है?

तेरी हर लहर से बारूद की बू आती है!

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खून कहाँ बहता है इन्सान का पानी की तरह 

जिस से तू रोज़ यहाँ करके वजू आती है?

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धाज्जियाँ तूने नकाबों की गिनी तो होंगी 

यूँ ही लौट आती है या कर के रफ़ू आती है?

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अपने सीने में चुरा लाई है किसे की आहें 

मल के रुखसार पे किस किस का लहू आती है!

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Dard Shayari Yaad Shayari zindagi Duniya Shayari

Posted In : Kaifi Azmi

17-Jul-2017
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