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Momin Khan Momin - Asar usko zara nahi hota

असर उस को ज़रा नहीं होता 

रंज राहत-फ़ज़ा नहीं होता 

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बेवफ़ा कहने की शिकायत है 

तो भी वादा-वफ़ा नहीं होता 

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ज़िक्र-ए-अग़्यार से हुआ मालूम 

हर्फ़-ए-नासेह बुरा नहीं होता 

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किस को है ज़ौक़-ए-तल्ख़-कामी लेक 

जंग बिन कुछ मज़ा नहीं होता 

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तुम हमारे किसी तरह न हुए 

वर्ना दुनिया में क्या नहीं होता 

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उस ने क्या जाने क्या किया ले कर 

दिल किसी काम का नहीं होता 

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इम्तिहाँ कीजिए मिरा जब तक 

शौक़ ज़ोर-आज़मा नहीं होता 

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एक दुश्मन कि चर्ख़ है न रहे 

तुझ से ये ऐ दुआ नहीं होता 

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आह तूल-ए-अमल है रोज़-फ़ुज़ूँ 

गरचे इक मुद्दआ नहीं होता 

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तुम मिरे पास होते हो गोया 

जब कोई दूसरा नहीं होता 

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हाल-ए-दिल यार को लिखूँ क्यूँकर 

हाथ दिल से जुदा नहीं होता 

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रहम बर-ख़स्म-ए-जान-ए-ग़ैर न हो 

सब का दिल एक सा नहीं होता 

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दामन उस का जो है दराज़ तो हो 

दस्त-ए-आशिक़ रसा नहीं होता 

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चारा-ए-दिल सिवाए सब्र नहीं 

सो तुम्हारे सिवा नहीं होता 

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क्यूँ सुने अर्ज़-ए-मुज़्तर ऐ 'मोमिन' 

सनम आख़िर ख़ुदा नहीं होता 

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Love Shayari Dard Shayari Sad Shayari Vaada Shayari

Posted In : Momin Khan Momin

17-Jul-2017
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