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Munauwar Rana - Haa.n Ijazat Hai Agar Koi Kahani Aor Hai

हाँ इजाज़त है अगर कोई कहानी और है 

इन कटोरों में अभी थोड़ा सा पानी और है 

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मज़हबी मज़दूर सब बैठे हैं इन को काम दो 

एक इमारत शहर में काफ़ी पुरानी और है 

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ख़ामुशी कब चीख़ बन जाए किसे मालूम है 

ज़ुल्म कर लो जब तलक ये बे-ज़बानी और है 

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ख़ुश्क पत्ते आँख में चुभते हैं काँटों की तरह 

दश्त में फिरना अलग है बाग़बानी और है 

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फिर वही उक्ताहटें होंगी बदन चौपाल में 

उम्र के क़िस्से में थोड़ी सी जवानी और है 

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बस इसी एहसास की शिद्दत ने बूढ़ा कर दिया 

टूटे-फूटे घर में इक लड़की सियानी और है 

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Dard Shayari Sad Shayari Yaad Shayari zindagi

Posted In : Munawwar Rana

16-Jul-2017
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