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Parveen Shakir - Bichda Hai Jo Ik Baar To Milte Nahi Dekha

बिछड़ा है जो इक बार तो मिलते नहीं देखा 

इस ज़ख़्म को हम ने कभी सिलते नहीं देखा 

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इक बार जिसे चाट गई धूप की ख़्वाहिश 

फिर शाख़ पे उस फूल को खिलते नहीं देखा 

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यक-लख़्त गिरा है तो जड़ें तक निकल आईं 

जिस पेड़ को आँधी में भी हिलते नहीं देखा 

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काँटों में घिरे फूल को चूम आएगी लेकिन 

तितली के परों को कभी छिलते नहीं देखा 

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किस तरह मिरी रूह हरी कर गया आख़िर 

वो ज़हर जिसे जिस्म में खिलते नहीं देखा 

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Love Shayari Dard Shayari Sad Shayari Yaad Shayari

Posted In : Parveen Shakir

16-Jul-2017
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