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Waseem Barelvi - Mai.n Aasma.n pe bahot der reh nahi sakta

मैं आसमाँ पे बहुत देर रह नहीं सकता 

मगर ये बात ज़मीं से तो कह नहीं सकता 

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किसी के चेहरे को कब तक निगाह में रक्खूँ 

सफ़र में एक ही मंज़र तो रह नहीं सकता 

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ये आज़माने की फ़ुर्सत तुझे कभी मिल जाए 

मैं आँखों आँखों में क्या बात कह नहीं सकता 

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सहारा लेना ही पड़ता है मुझ को दरिया का 

मैं एक क़तरा हूँ तन्हा तो बह नहीं सकता 

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लगा के देख ले जो भी हिसाब आता हो 

मुझे घटा के वो गिनती में रह नहीं सकता 

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ये चंद लम्हों की बे-इख़्तियारियाँ हैं 'वसीम' 

गुनह से रिश्ता बहुत देर रह नहीं सकता 

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zindagi Duniya Shayari

Posted In : Waseem Barelvi

17-Jul-2017
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