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Waseem Barelvi - Mai.n Apne khwab se bichda nazar nahi aata

मैं अपने ख़्वाब से बिछड़ा नज़र नहीं आता 

तो इस सदी में अकेला नज़र नहीं आता 

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अजब दबाओ है उन बाहरी हवाओं का 

घरों का बोझ भी उठता नज़र नहीं आता 

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मैं तेरी राह से हटने को हट गया लेकिन 

मुझे तो कोई भी रस्ता नज़र नहीं आता 

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मैं इक सदा पे हमेशा को घर तो छोड़ आया 

मगर पुकारने वाला नज़र नहीं आता 

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धुआँ भरा है यहाँ तो सभी की आँखों में 

किसी को घर मिरा जलता नज़र नहीं आता 

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ग़ज़ल-सराई का दावा तो सब करे हैं 'वसीम' 

मगर वो 'मीर' सा लहजा नज़र नहीं आता 

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zindagi Duniya Shayari

Posted In : Waseem Barelvi

17-Jul-2017
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