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Waseem Barelvi - Mai.n is ummeed pe dooba ki tu bacha lega

मैं इस उमीद पे डूबा कि तू बचा लेगा 

अब इस के ब'अद मिरा इम्तिहान क्या लेगा 

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ये एक मेला है व'अदा किसी से क्या लेगा 

ढलेगा दिन तो हर इक अपना रास्ता लेगा 

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मैं बुझ गया तो हमेशा को बुझ ही जाऊँगा 

कोई चराग़ नहीं हूँ कि फिर जला लेगा 

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कलेजा चाहिए दुश्मन से दुश्मनी के लिए 

जो बे-अमल है वो बदला किसी से क्या लेगा 

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मैं उस का हो नहीं सकता बता न देना उसे 

लकीरें हाथ की अपनी वो सब जला लेगा 

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हज़ार तोड़ के आ जाऊँ उस से रिश्ता 'वसीम' 

मैं जानता हूँ वो जब चाहेगा बुला लेगा 

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zindagi Duniya Shayari

Posted In : Waseem Barelvi

17-Jul-2017
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