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Khumar - ai maut unhe.n bhula.e zamane guzar ga.e

ai maut unheñ bhulā.e zamāne guzar ga.e 

aa jā ki zahr khaa.e zamāne guzar ga.e 

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o jaane vaale aa ki tire intizār meñ 

raste ko ghar banā.e zamāne guzar ga.e 

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ġham hai na ab ḳhushī hai na ummīd hai na yaas 

sab se najāt paa.e zamāne guzar ga.e 

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kyā lā.iq-e-sitam bhī nahīñ ab maiñ dosto 

patthar bhī ghar meñ aa.e zamāne guzar ga.e 

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jān-e-bahār phuul nahīñ aadmī huuñ maiñ 

aa jā ki muskurā.e zamāne guzar ga.e 

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kyā kyā tavaqquāt thiiñ aahoñ se ai 'ḳhumār' 

ye tiir bhī chalā.e zamāne guzar ga.e 

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  • 17-Jul-2017
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Momin Khan Momin - Asar usko zara nahi hota

असर उस को ज़रा नहीं होता 

रंज राहत-फ़ज़ा नहीं होता 

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बेवफ़ा कहने की शिकायत है 

तो भी वादा-वफ़ा नहीं होता 

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ज़िक्र-ए-अग़्यार से हुआ मालूम 

हर्फ़-ए-नासेह बुरा नहीं होता 

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किस को है ज़ौक़-ए-तल्ख़-कामी लेक 

जंग बिन कुछ मज़ा नहीं होता 

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तुम हमारे किसी तरह न हुए 

वर्ना दुनिया में क्या नहीं होता 

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उस ने क्या जाने क्या किया ले कर 

दिल किसी काम का नहीं होता 

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इम्तिहाँ कीजिए मिरा जब तक 

शौक़ ज़ोर-आज़मा नहीं होता 

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एक दुश्मन कि चर्ख़ है न रहे 

तुझ से ये ऐ दुआ नहीं होता 

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आह तूल-ए-अमल है रोज़-फ़ुज़ूँ 

गरचे इक मुद्दआ नहीं होता 

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तुम मिरे पास होते हो गोया 

जब कोई दूसरा नहीं होता 

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हाल-ए-दिल यार को लिखूँ क्यूँकर 

हाथ दिल से जुदा नहीं होता 

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रहम बर-ख़स्म-ए-जान-ए-ग़ैर न हो 

सब का दिल एक सा नहीं होता 

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दामन उस का जो है दराज़ तो हो 

दस्त-ए-आशिक़ रसा नहीं होता 

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चारा-ए-दिल सिवाए सब्र नहीं 

सो तुम्हारे सिवा नहीं होता 

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क्यूँ सुने अर्ज़-ए-मुज़्तर ऐ 'मोमिन' 

सनम आख़िर ख़ुदा नहीं होता 

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  • 17-Jul-2017
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Parveen Shakir - Bichda Hai Jo Ik Baar To Milte Nahi Dekha

बिछड़ा है जो इक बार तो मिलते नहीं देखा 

इस ज़ख़्म को हम ने कभी सिलते नहीं देखा 

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इक बार जिसे चाट गई धूप की ख़्वाहिश 

फिर शाख़ पे उस फूल को खिलते नहीं देखा 

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यक-लख़्त गिरा है तो जड़ें तक निकल आईं 

जिस पेड़ को आँधी में भी हिलते नहीं देखा 

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काँटों में घिरे फूल को चूम आएगी लेकिन 

तितली के परों को कभी छिलते नहीं देखा 

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किस तरह मिरी रूह हरी कर गया आख़िर 

वो ज़हर जिसे जिस्म में खिलते नहीं देखा 

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  • 16-Jul-2017
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Parveen Shakir - Agarche Tujh se Bahot Ikhtelaaf Bhi Na Hua

अगरचे तुझ से बहुत इख़्तिलाफ़ भी न हुआ 

मगर ये दिल तिरी जानिब से साफ़ भी न हुआ 

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तअ'ल्लुक़ात के बर्ज़ख़ में ही रखा मुझ को 

वो मेरे हक़ में न था और ख़िलाफ़ भी न हुआ 

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अजब था जुर्म-ए-मोहब्बत कि जिस पे दिल ने मिरे 

सज़ा भी पाई नहीं और मुआ'फ़ भी न हुआ 

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मलामतों में कहाँ साँस ले सकेंगे वो लोग 

कि जिन से कू-ए-जफ़ा का तवाफ़ भी न हुआ 

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अजब नहीं है कि दिल पर जमी मिली काई 

बहुत दिनों से तो ये हौज़ साफ़ भी न हुआ 

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हवा-ए-दहर हमें किस लिए बुझाती है 

हमें तो तुझ से कभी इख़्तिलाफ़ भी न हुआ 

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  • 16-Jul-2017
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Munauwar Rana - Haa.n Ijazat Hai Agar Koi Kahani Aor Hai

हाँ इजाज़त है अगर कोई कहानी और है 

इन कटोरों में अभी थोड़ा सा पानी और है 

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मज़हबी मज़दूर सब बैठे हैं इन को काम दो 

एक इमारत शहर में काफ़ी पुरानी और है 

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ख़ामुशी कब चीख़ बन जाए किसे मालूम है 

ज़ुल्म कर लो जब तलक ये बे-ज़बानी और है 

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ख़ुश्क पत्ते आँख में चुभते हैं काँटों की तरह 

दश्त में फिरना अलग है बाग़बानी और है 

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फिर वही उक्ताहटें होंगी बदन चौपाल में 

उम्र के क़िस्से में थोड़ी सी जवानी और है 

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बस इसी एहसास की शिद्दत ने बूढ़ा कर दिया 

टूटे-फूटे घर में इक लड़की सियानी और है 

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  • 16-Jul-2017
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Munauwar Rana - Ana Hawas Ki Dukaano.n Me Aake Baith Gayi

अना हवस की दुकानों में आ के बैठ गई 

अजीब मैना है शिकरों में आ के बैठ गई 

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जगा रहा है ज़माना मगर नहीं खुलतीं 

कहाँ की नींद इन आँखों में आ के बैठ गई 

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वो फ़ाख़्ता जो मुझे देखते ही उड़ती थी 

बड़े सलीक़े से बच्चों में आ के बैठ गई 

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तमाम तल्ख़ियाँ साग़र में रक़्स करने लगीं 

तमाम गर्द किताबों में आ के बैठ गई 

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तमाम शहर में मौज़ू-ए-गुफ़्तुगू है यही 

कि शाहज़ादी ग़ुलामों में आ के बैठ गई 

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नहीं थी दूसरी कोई जगह भी छुपने की 

हमारी उम्र खिलौनों में आ के बैठ गई 

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उठो कि ओस की बूँदें जगा रही हैं तुम्हें 

चलो कि धूप दरीचों में आ के बैठ गई 

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चली थी देखने सूरज की बद-मिज़ाजी को 

मगर ये ओस भी फूलों में आ के बैठ गई 

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तुझे मैं कैसे बताऊँ कि शाम होते ही 

उदासी कमरे के ताक़ों में आ के बैठ गई 

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  • 16-Jul-2017
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Munauwar Rana - Aap ko chehre se bhi beemar hona chahiye

आप को चेहरे से भी बीमार होना चाहिए 

इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए 

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आप दरिया हैं तो फिर इस वक़्त हम ख़तरे में हैं 

आप कश्ती हैं तो हम को पार होना चाहिए 

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ऐरे-ग़ैरे लोग भी पढ़ने लगे हैं इन दिनों 

आप को औरत नहीं अख़बार होना चाहिए 

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ज़िंदगी तू कब तलक दर-दर फिराएगी हमें 

टूटा-फूटा ही सही घर-बार होना चाहिए 

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अपनी यादों से कहो इक दिन की छुट्टी दे मुझे 

इश्क़ के हिस्से में भी इतवार होना चाहिए 

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  • 16-Jul-2017
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Josh Malihabadi - Fir sir kisi ke dar pe jhukae hue hai hum

फिर सर किसी के दर पे झुकाए हुए हैं हम

पर्दे फिर आसमाँ के उठाए हुए हैं हम

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छाई हुई है इश्क़ की फिर दिल पे बे-ख़ुदी

फिर ज़िंदगी को होश में लाए हुए हैं हम

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जिस का हर एक जुज़्व है इक्सीर-ए-ज़िंदगी

फिर ख़ाक में वो जिंस मिलाए हुए हैं हम

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हाँ कौन पूछता है ख़ुशी का नहुफ़्ता राज़

फिर ग़म का बार दिल पे उठाए हुए हैं हम

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हाँ कौन दर्स-ए-इश्क़-ए-जुनूँ का है ख़्वास्त-गार

आए कि हर सबक़ को भुलाए हुए हैं हम

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आए जिसे हो जादा-ए-रिफ़अत की आरज़ू

फिर सर किसी के दर पे झुकाए हुए हैं हम

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बैअत को आए जिस को हो तहक़ीक़ का ख़याल

कौन-ओ-मकाँ के राज़ को पाए हुए हैं हम

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हस्ती के दाम-ए-सख़्त से उकता गया है कौन

कह दो कि फिर गिरफ़्त में आए हुए हैं हम

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हाँ किस के पा-ए-दिल में है ज़ंजीर-ए-आब-ओ-गिल

कह दो कि दाम-ए-ज़ुल्फ़ में आए हुए हैं हम

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हाँ किस को जुस्तुजू है नसीम-ए-फ़राग़ की

आसूदगी को आग लगाए हुए हैं हम

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हाँ किस को सैर-ए-अर्ज़-ओ-समा का है इश्तियाक़

धूनी फिर उस गली में रमाए हुए हैं हम

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जिस पर निसार कौन-ओ-मकाँ की हक़ीक़तें

फिर 'जोश' उस फ़रेब में आए हुए हैं हम

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  • 15-Jul-2017
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Kumar Vishvas - Ye ḳhayalo.n ki bad-havasi hai

ye ḳhayalo.n ki bad-havasi hai 

ya tire naam ki udasi hai 

aaine ke liye to patli hain 

ek ka.aba hai ek kashi hai 

tum ne ham ko tabah kar Daala 

baat hone ko ye zara si hai

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  • 14-Jul-2017
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Kumar Vishvas - Koi deewana kehta hai koi pagal samjhta hai

Koi deewana kehta hai koi pagal samjhta hai…

magar dharti ki bechaini ko bas badal samjhta hain…

Main tujhse dur kaisa hu, tu mujhse dur kaisi hai…

Yeh tera dil samjhta hai, ya mera dil samjhta hai…

 

Ke mohobbat ek ehsaason ki paawan si kahaani hai…

kabhi kabira deewana tha kabhi meera diwaani hai…

Yahaan sab log kehte hain meri aakho mein aasu hain…

Jo tu samjhe toh moti hain jo na samjhe toh paani hain…

 

Samandar peer ke andar hain lekin ro nahi sakta…

Yeh aansu pyaar ke moti hain isko kho nahi sakta…

Meri chahat ko dulhan tu bana lena magar sun le…

Jo mera ho nahi paaya woh tera ho nahi sakta…

 

Bhramar koi kumudni par machal baitha toh hungama…

Jo apne dil mein koi khwaab pal baitha toh hungama…

Abhi tak doob kar sunte the sab kissa mohobbat ka…

Main kisse ko hakikat mein badal baitha toh hungama…

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  • 14-Jul-2017
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