Bootstrap Image Preview
shayaridunia.com

Kabhi usne bhi hume chahat ka paigaam likha tha

Kabhi usne bhi hume chahat ka paigaam likha tha,

Sab kuch usne apna hamare naam likha tha,

Suna hai aaj usko hamare zikr se bhi nafrat hai,

Jisne kabhi apne dil pe hamara naam likha tha. cry

कभी उसने भी हमें चाहत का पैगाम लिखा था,
सब कुछ उसने अपना हमारे नाम लिखा था,
सुना हैं आज उनको हमारे जिक्र से भी नफ़रत है,
जिसने कभी अपने दिल पर हमारा नाम लिखा था.

...read more
  • 28-Jul-2017
  • |
  • 210 views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Momin Khan Monin - Ai Aarzu-e-Qatl Zara DIl Ko Thamna

ऐ आरज़ू-ए-क़त्ल ज़रा दिल को थामना 

मुश्किल पड़ा मिरा मिरे क़ातिल को थामना 

-----------*----------

तासीर-ए-बे-क़रारी-ए-नाकाम आफ़रीं 

है काम उन से शोख़-ए-शमाइल को थामना 

-----------*----------

देखे है चाँदनी वो ज़मीं पर न गिर पड़े 

ऐ चर्ख़ अपने तू मह-ए-कामिल को थामना 

-----------*----------

मुज़्तर हूँ किस का तर्ज़-ए-सुख़न से समझ गया 

अब ज़िक्र क्या है सामा-ए-आक़िल को थामना 

-----------*----------

हो सरसर-ए-फ़ुग़ाँ से न क्यूँकर वो मुज़्तरिब 

मुश्किल हुआ है पर्दा-ए-महमिल को थामना 

-----------*----------

सीखे हैं मुझ से नाला-ए-नय आसमाँ-शिकन 

सय्याद अब क़फ़स में अनादिल को थामना 

-----------*----------

ये ज़ुल्फ़ ख़म-ब-ख़म न हो क्या ताब-ए-ग़ैर है 

तेरे जुनूँ-ज़दे की सलासिल को थामना 

-----------*----------

ऐ हमदम आह तल्ख़ी-ए-हिज्राँ से दम नहीं 

गिरता है देख जाम-ए-हलाहिल को थामना 

-----------*----------

सीमाब-वार मर गए ज़ब्त-ए-क़लक़ से हम 

क्या क़हर है तबीअत-ए-माइल को थामना 

-----------*----------

आग़ोश-ए-गोर हो गई आख़िर लहूलुहान 

आसाँ नहीं है आप के बिस्मिल को थामना 

-----------*----------

सीने पे हाथ धरते ही कुछ दम पे बन गई 

लो जान का अज़ाब हुआ दिल को थामना 

-----------*----------

बाक़ी है शौक़-ए-चाक-ए-गरेबाँ अभी मुझे 

बस ऐ रफ़ूगर अपनी अनामिल को थामना 

-----------*----------

मत माँगियो अमान बुतों से कि है हराम 

'मोमिन' ज़बान-ए-बेहूदा साइल को थामना 

-----------*----------

...read more
  • 17-Jul-2017
  • |
  • 112 views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Momin Khan Momin - Asar usko zara nahi hota

असर उस को ज़रा नहीं होता 

रंज राहत-फ़ज़ा नहीं होता 

-----------*----------

बेवफ़ा कहने की शिकायत है 

तो भी वादा-वफ़ा नहीं होता 

-----------*----------

ज़िक्र-ए-अग़्यार से हुआ मालूम 

हर्फ़-ए-नासेह बुरा नहीं होता 

-----------*----------

किस को है ज़ौक़-ए-तल्ख़-कामी लेक 

जंग बिन कुछ मज़ा नहीं होता 

-----------*----------

तुम हमारे किसी तरह न हुए 

वर्ना दुनिया में क्या नहीं होता 

-----------*----------

उस ने क्या जाने क्या किया ले कर 

दिल किसी काम का नहीं होता 

-----------*----------

इम्तिहाँ कीजिए मिरा जब तक 

शौक़ ज़ोर-आज़मा नहीं होता 

-----------*----------

एक दुश्मन कि चर्ख़ है न रहे 

तुझ से ये ऐ दुआ नहीं होता 

-----------*----------

आह तूल-ए-अमल है रोज़-फ़ुज़ूँ 

गरचे इक मुद्दआ नहीं होता 

-----------*----------

तुम मिरे पास होते हो गोया 

जब कोई दूसरा नहीं होता 

-----------*----------

हाल-ए-दिल यार को लिखूँ क्यूँकर 

हाथ दिल से जुदा नहीं होता 

-----------*----------

रहम बर-ख़स्म-ए-जान-ए-ग़ैर न हो 

सब का दिल एक सा नहीं होता 

-----------*----------

दामन उस का जो है दराज़ तो हो 

दस्त-ए-आशिक़ रसा नहीं होता 

-----------*----------

चारा-ए-दिल सिवाए सब्र नहीं 

सो तुम्हारे सिवा नहीं होता 

-----------*----------

क्यूँ सुने अर्ज़-ए-मुज़्तर ऐ 'मोमिन' 

सनम आख़िर ख़ुदा नहीं होता 

-----------*----------

...read more
  • 17-Jul-2017
  • |
  • 126 views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Parveen Shakir - Bichda Hai Jo Ik Baar To Milte Nahi Dekha

बिछड़ा है जो इक बार तो मिलते नहीं देखा 

इस ज़ख़्म को हम ने कभी सिलते नहीं देखा 

-----------------*------------------

इक बार जिसे चाट गई धूप की ख़्वाहिश 

फिर शाख़ पे उस फूल को खिलते नहीं देखा 

-----------------*------------------

यक-लख़्त गिरा है तो जड़ें तक निकल आईं 

जिस पेड़ को आँधी में भी हिलते नहीं देखा 

-----------------*------------------

काँटों में घिरे फूल को चूम आएगी लेकिन 

तितली के परों को कभी छिलते नहीं देखा 

-----------------*------------------

किस तरह मिरी रूह हरी कर गया आख़िर 

वो ज़हर जिसे जिस्म में खिलते नहीं देखा 

-----------------*------------------

...read more
  • 16-Jul-2017
  • |
  • 153 views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Munauwar Rana - Haa.n Ijazat Hai Agar Koi Kahani Aor Hai

हाँ इजाज़त है अगर कोई कहानी और है 

इन कटोरों में अभी थोड़ा सा पानी और है 

-----------------*------------------

मज़हबी मज़दूर सब बैठे हैं इन को काम दो 

एक इमारत शहर में काफ़ी पुरानी और है 

-----------------*------------------

ख़ामुशी कब चीख़ बन जाए किसे मालूम है 

ज़ुल्म कर लो जब तलक ये बे-ज़बानी और है 

-----------------*------------------

ख़ुश्क पत्ते आँख में चुभते हैं काँटों की तरह 

दश्त में फिरना अलग है बाग़बानी और है 

-----------------*------------------

फिर वही उक्ताहटें होंगी बदन चौपाल में 

उम्र के क़िस्से में थोड़ी सी जवानी और है 

-----------------*------------------

बस इसी एहसास की शिद्दत ने बूढ़ा कर दिया 

टूटे-फूटे घर में इक लड़की सियानी और है 

-----------------*------------------

...read more
  • 16-Jul-2017
  • |
  • 137 views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Munauwar Rana - Ana Hawas Ki Dukaano.n Me Aake Baith Gayi

अना हवस की दुकानों में आ के बैठ गई 

अजीब मैना है शिकरों में आ के बैठ गई 

-----------------*------------------

जगा रहा है ज़माना मगर नहीं खुलतीं 

कहाँ की नींद इन आँखों में आ के बैठ गई 

-----------------*------------------

वो फ़ाख़्ता जो मुझे देखते ही उड़ती थी 

बड़े सलीक़े से बच्चों में आ के बैठ गई 

-----------------*------------------

तमाम तल्ख़ियाँ साग़र में रक़्स करने लगीं 

तमाम गर्द किताबों में आ के बैठ गई 

-----------------*------------------

तमाम शहर में मौज़ू-ए-गुफ़्तुगू है यही 

कि शाहज़ादी ग़ुलामों में आ के बैठ गई 

-----------------*------------------

नहीं थी दूसरी कोई जगह भी छुपने की 

हमारी उम्र खिलौनों में आ के बैठ गई 

-----------------*------------------

उठो कि ओस की बूँदें जगा रही हैं तुम्हें 

चलो कि धूप दरीचों में आ के बैठ गई 

-----------------*------------------

चली थी देखने सूरज की बद-मिज़ाजी को 

मगर ये ओस भी फूलों में आ के बैठ गई 

-----------------*------------------

तुझे मैं कैसे बताऊँ कि शाम होते ही 

उदासी कमरे के ताक़ों में आ के बैठ गई 

-----------------*------------------

...read more
  • 16-Jul-2017
  • |
  • 128 views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Kumar Vishvas - Ye ḳhayalo.n ki bad-havasi hai

ye ḳhayalo.n ki bad-havasi hai 

ya tire naam ki udasi hai 

aaine ke liye to patli hain 

ek ka.aba hai ek kashi hai 

tum ne ham ko tabah kar Daala 

baat hone ko ye zara si hai

...read more
  • 14-Jul-2017
  • |
  • 134 views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Koi ummeed bar nahi aati koi soorat nazar nahi aati

Koi ummeed bar nahi aati
koi soorat nazar nahi aati

--------------*---------------

Kaun hai jo nahi hai haajat-mand
kis ki haajat ravaa.n kare koi

--------------*---------------

‘Ghalib’ chhuti sharaab par ab bhi kabhi-kabhi
peeta huun roz-e-abra o shab-e-maahtaab mein

--------------*---------------

‘Ghalib’ bura na maan jo vaaiz bura kahe
aisa bhi koi hai ki sab achchha kahen jise

--------------*---------------

Jab ki tujh bin nahi koi maujood
fir ye hangama ai khuda kya hai

--------------*---------------

Jaan tum par nisaar karta huun
mai nahi jaanta dua kya hai

--------------*---------------

Jee dhoondhta hai fir vahi fursat ke raat din
baithe rahen tasavvur-e-jaanaan kiye huye

--------------*---------------

Tum jaano tum ko gair se jo rasm-o-raah ho
mujh ko bhi poochhte raho to kya gunaah ho

--------------*---------------

Tire vaade par jiye ham to ye jaan jhoot jaana
ki khushi se mar na jaate agar etibaar hota

--------------*---------------

Thee khabar garm ki ‘Ghalib’ ke udenge purje
dekhne ham bhi gaye the pa tamasha na hua

--------------*---------------

De mujh ko shikaayat kee ijaazat ki sitamgar
kuchh tujh ko mazaa bhi mire aazaar mein aave

...read more
  • 05-Jul-2017
  • |
  • 148 views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Udhar vo bad-gumani hai idhar ye naa-tavaani hai

Udhar vo bad-gumani hai idhar ye naa-tavaani hai
na poochha jaaye hai us se na bola jaaye hai mujh se

---------------------*-----------------------

Un ke dekhe se jo aa jaati hai munh pe raunak
vo samajhte hain ki beemar ka haal achchha hai

---------------------*-----------------------

Etibar-e-ishq kee khana-kharaabi dekhna
gair ne kee aah lekin vo khafaa mujh par huye

---------------------*-----------------------

Qat’a keejiye na taalluk ham se
kuchh nahi hai to adaavat hi sahi

---------------------*-----------------------

Karz kee peete the may lekin samajhte the ki haan
rang laavegi hamaari faaka-masti ek din

---------------------*-----------------------

Kahaan may-khaane ka darvaaja ‘Ghalib’ aur kahaan vaaiz
par itna jaante hain kal vo jaata tha ki ham nikle

---------------------*-----------------------

Kaaba kis munh se jaaoge ‘Ghalib’
sharm tum ko magar nahi aati

---------------------*-----------------------

Qaasid ke aate-aate khat ik aur likh rakhuun
mai jaanta huun jo vo likhenge jawaab mein

---------------------*-----------------------

Kitne sheereen hain tere lab ki raqeeb
gaaliyaan kha ke be-mazaa na hua

---------------------*-----------------------

Kee mire qatl ke baad us ne jafaa se tauba
haaye us zood-pasheemaan ka pasheemaan hona

...read more
  • 05-Jul-2017
  • |
  • 152 views
  • |
  • |
shayaridunia.com

Apni gali men mujhko na kar dafn baad-e-qatl

Apni gali men mujhko na kar dafn baad-e-qatl
mere pate se khalq ko kyuun tera ghar mile

---------------------*------------------------

Aaina dekh apna sa munh le ke rah gaye
saahab ko dil na dene pe kitna guruur tha

---------------------*------------------------

Aaye hai be-kasi-e-ishq pe rona ‘Ghalib’
kis ke ghar jaayega sailaab-e-balaa mere baad

---------------------*------------------------

Aage aati thi haal-e-dil pe hansi
ab kisi baat par nahi aati

---------------------*------------------------

Aata hai daagh-e-hasrat-e-dil ka shumaar yaad
mujh se mire gunah ka hisaab ai khuda na maang

---------------------*------------------------

Aashiq hoon pe maashooq-farebi hai mira kaam
majnuun ko bura kahti hai laila mere aage

---------------------*------------------------

Ishq ne ‘Ghalib’ nikamma kar diya
varna ham bhi aadmi the kaam ke

---------------------*------------------------

Ishq par zor nahi hai ye vo aatash ‘Ghalib’
ki lagaaye na lage aur bujhaaye na bane

---------------------*------------------------

Is nazaaqat ka bura ho vo bhale hain to kya
haath aave to unhe haath lagaaye na bane

---------------------*------------------------

Is saadgi pe kaun na mar jaaye ai khuda
ladte hain aur haath mein talwaar bhi nahi

...read more
  • 05-Jul-2017
  • |
  • 159 views
  • |
  • |
shayaridunia.com | Latest Shayari, Best Romantic Shayari, 2 Line Shayari, New Love Shayari, Top Dard Shayari, Ghazal, SMS, Whatsapp Status and Festival Wishes in English Font, Latest Zindagi Shayari, Deep-Best Life Quotes, Whatsapp Life Status Shayari On Life, Sad Zindagi Shayari, hindi sad shayari on life, Best Life Shayari, ज़िन्दगी शायरी Hindi collection, Top Heart Touching Zindagi Shayari, Sad Life Sms, Hindi Quotes On Life In Hindi Fonts, my life my shayari, Lonely Life Shayari, True Lines About Life, Good Shayari on Jindagi, Sad Shayari on Zindagi, Positive Life Quotes on Smile in Hindi, Best Inspirational Hindi Poems on Life, Short Reality of Life Quotes, Sad True Life Shayari on Dil, Ultimate Shayari of Life, Sad Zindagi Message on Life For Friends, Zindagi Shayari is depend on real life and related with life thoughts,Dard Shayari, दर्द शायरी, Dard Bhari Shayari, Dard Ki Shayari, Painful Shayari, Hindi Dard Shayari,Aankhein Shayari, Alone Shayari, Ashq Shayari, Attitude Shayari, Bewafa Shayari, Birthday Shayari, Bollywood Shayari, Broken Heart Shayari, Dard Bhari Shayari, Desh Bhakti Shayari, Dil Shayari, Dooriyan Shayari, Dua Shayari, Friendship Shayari, Funny Shayari, Gam Bhari Shayari, Good Morning Shayari, Heart Touching Lines, Hindi Shayari, Inspirational Shayari, Insult Shayari, Intezaar Shayari, Judai Shayari, Love Shayari, Maa Shayari, Maut Shayari, Nafrat Shayari, Punjabi Shayari, Romantic Shayari, Sad Shayari, Sharab Shayari, Shayari On Beauty, Shayari On Life, Sorry Shayari, Two Line Shayari, Yaad Shayari